अवाम बंगाल के दासत्व से चाहती है मुक्ति
कर्सियांग : जनता बंगाल के दासत्व से मुक्ति पाना चाहती है। सरकार द्वारा कोई अस्थायी प्रस्ताव देने से जनता की इच्छा पूरी नहीं होगी। यह बातें गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस के केंद्रीय कमेटी अध्यक्ष डीके बम्जन ने गुरुवार को कही। उन्होंने कहा कि दस्तावेज के आधार पर संपूर्ण दार्जिलिंग जिला सहित कालिम्पोंग व डुवार्स का संपूर्ण भूभाग सिक्किम राज्य का अंग था। इस भूभाग को तुरन्त सिक्किम में शामिल करने की मांग हम कर रहे हैं परन्तु वर्तमान केंद्र सरकार व बंगाल सरकार ने गोरखालैंड अटोनोसम अथारिटी लागू करने के प्रयास मेंबंगाल के दासत्व से अलग होने के दरवाजे को बंद करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में 3 अगस्त को कोलकाता स्थित राइटर्स बिल्डिंग में संपन्न बैठक में हमने अपने मुद्दे को स्पष्ट किया। यह भूभाग सिक्किम का अभिन्न अंग है। इस भूभाग को सिक्किम में समावेश नहीं किए जाने तक इस भूभाग के संदर्भ में किसी भी तरह के राजनीतिक समझौते का प्रयास हुआ तो इससे लोगों को समस्या होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 में भी इसी प्रकार से राजनीतिक खिलवाड़ कर गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के नेता सुभाष घीसिंग को दागोपाप के सुपुर्द किया गया था परन्तु उस दागोपाप से जनता की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। इस बार भी केंद्र व राज्य सरकार दोनों गोरखालैंड आटोनोमस अथारिटी देकर जनता को लुभाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भूभाग बंगाल का अंग ही नहीं है, उस भूभाग को बंगाल से हटाने के लिए केंद्र सरकार के सामने नहीं आने का प्रमुख कारण इस भूभाग का असली मालिक सिक्किम सरकार का मौन रहना है। सिक्किम सरकार को इस संदर्भ में अपना पक्ष रख तुरन्त अपने खोए हुए भूभाग को वापस मांगने के लिए आगे आने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे समय सिक्किम सरकार इस भूभाग का दावा नहीं करती है तो इसका मालिक कौन इस संबंध में सिक्किम सरकार को आधिकारिक रूप स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने पार्वत्य क्षेत्र की जनता व राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर सहयोग व समर्थन करने का आह्वान किया है।
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