अब नेपाल में दौड़ेगी भारतीय रेल
सिलीगुड़ी। पाकिस्तान व बांग्लादेश की सरजमीं को चूमने के बाद अब भारतीय रेल पड़ोसी राष्ट्र नेपाल का भी सफर करेगी। इसके लिए रेल मंत्रालय की 159 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने की योजना है। इस परियोजना का प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। इसके मुताबिक परियोजना पर करीब 238.83 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। ंवर्ष 2010-11 के रेल बजट में शामिल इस परियोजना को तीन वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाना है। अब इंतजार सिर्फ रेल लाइन बिछाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने व रेल मंत्रालय की ओर से काम शुरू करने के लिए हरी झंडी का है। इस परियोजना के तहत पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे न्यू जलपाईगुड़ी से काकरभिट्टा बारास्ता पानीटंकी (नेपाल) तक 46 किलोमीटर रेल लाइन बिछाएगा। पहले चरण में न्यू जलपाईगुड़ी से नक्सलबाड़ी तक 15.9 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जाएगी। इसके तहत पश्चिम बंगाल में 10.6 किलोमीटर, जबकि नेपाल में 5.32 किलोमीटर रेल लाइन होगी।इस कार्य के लिए सर्वे कर लिया गया है। कटिहार रेल मंडल के डीआरएम बीएल पाटिल ने कहा कि फाइनल सर्वेक्षण रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। जोगबनी से विराटनगर (नेपाल) तक 18 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का कार्य वर्ष 2011 में शुरू हो जाएगा। इस कार्य में करीब 238.83 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेल लाइन बिछाने का कार्य इरकॉन कंपनी को सौंपा गया है। इस परियोजना में सबसे बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम जयनगर (बिहार) से बिजलपुरा (नेपाल) तक 68 किलोमीटर का है। बाद में इस रूट पर आमान परिवर्तन कर इसका विस्तार बरदीवास तक विस्तार किया जाएगा। भारत-नेपाल में रेल लाइन का विस्तार बड़े पैमाने पर किया जाएगा। नेपालगंज रोड (बिहार) से 12 किलोमीटर रेल लाइन नेपालगंज (नेपाल) तक और नौतनवा (बिहार) से भैराहवां (नेपाल) तक 15 किलोमीटर तक रेल लाइन बिछाकर भारतीय रेल को पड़ोसी देश तक पहुंचाया जाएगा।
नेपाल में ट्रेन कितनी सुरक्षित ?
न्यू जलपाईगुड़ी से काकरभिट्ठा बारास्ता पानीटंकी के लिए रेल मंत्रालय की रेल सेवा शुरू करने की पहल काफी अच्छी है। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से यह रेल-मंत्रालय के लिए परेशानी का सबब होगा। रेलमार्ग से जुड़ जाने के बाद भारत-नेपाल सीमांत पानीटंकी, दुलालजोत, मियाबस्ती, मदन जोत, नक्सलबाड़ी व टुकरियाबस्ती के लोगों को एनजेपी के लिए बस से मुक्ति मिल जाएगी। छात्र- छात्राओं और पर्यटकों के लिए यह सेवा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इस स्वप्ननील योजना को लेकर जहां एक ओर खुशी जाहिर की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसकी सुरक्षा को ले कई प्रश्न भी उठाये जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के दयानंद बर्मन, संतोष मल्लिक, गोविंद राय, मंतोष दास और सुशीला एक्का का कहना है कि नेपाल में राजतंत्र की समाप्ति के बाद माओवादी लगातार भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। वहां बात -बात पर भारतीय वाहनों को फूंक दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में क्या माओवादी भारतीय रेल को निशाना नहीं बनाएंगे? वैसे ही नेपाल से भारत में होने वाली तस्करी के लिए काकरभिट्ठा से लेकर न्यू जलपाईगुड़ी का क्षेत्र पहले से ही चर्चित रहा है। नेपाल के काकरभिट्ठा और धुलाबाड़ी से विदेशी सुपारी, साबुन, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री आदि की तस्करी धड़ल्ले से होती है। ऐसी स्थिति में काकरभिट्ठा से सीधे ट्रेनों के माध्यम से तस्करी को अंजाम दिया जाएगा।
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किसी भी सुविधा का नाजायज फायदा तो उठा ही सकते हैं लोग !!
ReplyDeleteसही बात है कि सुरक्षा बड़ा मुद्दा है, इस पर ध्यान देना आवश्यक है.
ReplyDeleteआपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
ReplyDeleteआप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "हिन्दप्रभा" (Hindprabha) पर.
यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -
वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?
ब्लागजगत पर आपका स्वागत है ।
ReplyDeleteकिसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्लाग के स्वामी अंकुर जी, हिन्दी टेक ब्लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।
ब्लाग जगत पर संस्कृत की कक्ष्या चल रही है ।
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