पिछले 10 सालो से फोन डायरेक्टरी प्रकाशित नहीं
सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग) : टेलीफोन विभाग पिछले दस वर्षो से डायरेक्टरी नहीं प्रकाशित कर रहा है। पिछली बार वर्ष 2001 में डायरेक्टरी प्रकाशित की गई थी। तब से मोबाइल क्रान्ति के चलते बहुत से नंबर अब कट चुके हैं या बदल चुके हैं। जब डायरेक्टरी का प्रकाशन हुआ था तब शहर के नंबर छह डिजिट में हुआ करते थे। अब सात डिजिट में हैं, लिहाजा जिनके पास वर्ष 2001 में प्रकाशित डायरेक्टरी है वह अब किसी काम की नहीं है। बीएसएनएल के महाप्रबंधक एस के सामंत कहते हैं कि फिलहाल विभाग द्वारा अभी डायरेक्टरी प्रकाशित करने की कोई योजना नहीं है। विभाग द्वारा आवंटित नंबर वेबसाइट पर उपलब्ध हैं जिसे लोग देख सकते हैं। वैसे भी अब लोग लैंड लाइन ले ही कहां रहे हैं। जिनके पास कंप्यूटर नहीं है या जो इंटरनेट का प्रयोग करना नहीं जानते वह कैसे वेबसाइट देखेंगे, के सवाल पर उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि लोग जमाने के साथ चलना सीखें। हालांकि विभाग के इस तर्क को उपभोक्ता कुतर्क मानते हैं। उनका कहना है कि जब डायरेक्टरी प्रकाशित हुई थी तो लोगों ने इसे हाथों हाथ लिया था। आज भी शहर में ही 40 हजार से ज्यादा लैंड लाइन उपभोक्ता हैं, इसके अलावा जिनके पास लैंड लाइन नहीं है उन्हें भी टेलीफोन विभाग के डायरेक्टरी की कमी खलती है। साठ वर्षीय निरंजन महतो का कहना है कि बीएसएनएल को डायरेक्टरी प्रकाशित करना चाहिए। अब किसी पुराने दोस्त का नम्बर खोजना है तो क्या हम वेवसाइट पर जाकर देखेंगे। जब कंप्यूटर ही चलाना नहीं आता है तो वेबसाइट पर उसे देखेंगे कैसे। श्रीमती गीता देवी का भी मानना है कि डायरेक्टरी एक ऐसा माध्यम है कि जिसमें हम वर्षो पुराने नम्बरों को देख सकते है। इस प्रकार से इस सुविधा को समाप्त नहीं करना चाहिए। कहां इस उम्र में जाकर वेवसाइट की सुविधा लेंगे। हाकिमपाड़ा निवासी तपन पाल का मानना है कि टेलीफोन डायरेक्टरी उपलब्ध होनी चाहिए। कई बार किसी दुकान आदि नंबर खोजने में बहुत परेशानी होती है।
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