घीसिंग ने किया गोरखा-आदिवासी प्रदेश का विरोध
जलपाईगुड़ी। गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा [गोरामुमो] के अध्यक्ष सुभाष घीसिंग ने गोरखा-आदिवासी प्रदेश की मांग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि दोनों समुदाय के मुद्दे अलग-अलग हैं, फिर दोनों के लिए एक राज्य की मांग कैसे की जा सकती है। दोनों की आबादी में भी बड़ा फर्क है।उन्होंने आश्चर्य जताया कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा [गोजमुमो] कभी कुछ मांग करता है, तो कभी कुछ। वैसे भी राज्य व केंद्र सरकार ने गोरखालैंड राज्य के गठन से स्पष्ट इन्कार कर दिया है। इसलिए पहाड़ पर सिर्फ छठी अनुसूची लागू होने से ही विकास हो सकता है। पार्वत्य क्षेत्र की राजनीति में अपनी पार्टी के एक बार फिर सक्रिय होने का एहसास कराते हुए उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग हिल्स में निकाय व अन्य चुनाव कराए जाने चाहिए।वहां होने वाले हर चुनाव में गोरामुमो हिस्सा लेगा और अकेले चुनाव लड़ेगा। लंबी चुप्पी के बाद मुंह खोलने वाले घीसिंग ने कहा कि पहाड़ पर मदन तमांग हत्याकांड जैसी और भी वारदात हो सकती हैं, इसीलिए वे फिलहाल वहां नहीं जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोरखा लीग के अध्यक्ष मदन तमांग को उन्होंने वर्ष 2005-06 में ही सतर्क रहने के लिए कहा था। उन्हें विरोध की राजनीति नहीं करने और पहाड़ के मुद्दे पर कम बोलने की सलाह दी थी, लेकिन वह नहीं माने। उनकी हत्या की निंदा करते हुए घीसिंग ने कहा कि तमांग के हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। तमांग की हत्या के बाद राजनीति शुरू होने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए घीसिंग ने कहा कि इस मुद्दे पर गोरामुमो ने कभी राजनीति नहीं की। तमांग की शोकसभा के दौरान अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के संबंध में उन्होंने कहा कि वे शायद खुखरी लेकर पहाड़ पर जाने के दोषी थे। इसलिए पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना ही चाहिए था। पुलिस के लिए सभी समान हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति-शांति बोलने से पहाड़ पर शांति स्थापित नहीं हो जाएगी। इसके लिए वहां पुलिस को सक्रिय होना चाहिए और हिल्स के मुद्दे पर राजनीतिक वार्ता होनी चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि विमल गुरुंग ने कहा है कि यदि वह चाहते तो घीसिंग को बहुत पहले ही मार चुके होते, तो प्रतिक्रिया में गोरामुमो अध्यक्ष हंस पड़े।
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