गोजमुमो ने प्रस्तावित गोरखालैंड का नाम बदला
दार्जिलिंग। अब अंतरिम सेटअप नहीं, बल्कि अलग राज्य के मुद्दे पर ही वार्ता होगी। मगर अब प्रस्तावित राज्य का नाम गोरखालैंड नहीं, बल्कि गोरखा-आदिवासी प्रदेश होगा। इस मुद्दे पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद से वार्ता की जाएगी। यह ऐलान किया गोरखा जनमुक्ति मोर्चा [गोजमुमो] के सुप्रीमो विमल गुरुंग ने। वह रविवार को यहां नार्थ प्वाइंट मैदान में अपनी 'ताकत रैली' के दौरान समर्थकों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अपनी घोषणा का औचित्य बताते हुए कहा कि गोरखालैंड राज्य के नाम पर आदिवासियों समेत तराई-डुवार्स के कई अन्य समुदायों को आपत्ति थी। इसी वजह से हमने यह निर्णय लिया है। चूंकि गोरखा के साथ आदिवासी एवं राजवंशी समुदाय भी बंगाल सरकार के दमन-शोषण से पीड़ित हैं, इसलिए उन्हें अपने प्रदेश में बराबर का दर्जा देने में कोई परेशानी नहीं है। जल्द ही इसे लेकर संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। डुवार्स क्षेत्र में तीन जगहों पर गोजमुमो सभा करेगी।
वास्तव में केंद्र सरकार ने अंतरिम सेटअप का आफर दिया था, जिसे लेकर अस्थायी समझौते के लिए गोजमुमो तैयार हो गया था। उसमें तराई-डुवार्स के गोरखा बहुल इलाकों को शामिल करने की मांग की गई थी, लेकिन उसमें भी बंगाल सरकार ने रोडे़ अटकाए। 10 जून से होने वाले आंदोलन को स्थगित करने का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि इसी बीच अगली त्रिपक्षीय वार्ता की तारीख तय की जाएगी। गोरखा लीग नेता मदन तमांग की हत्या के बारे में विपक्षी दलों के आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इन दलों को यह जानना जरूरी है कि 10 मार्च, 2008 को 21 वर्ष तक दार्जिलिंग हिल्स में तानाशाही चलाने वाले गोरामुमो अध्यक्ष सुभाष घीसिंग को पहाड़ से खदेड़ने का काम किया गया था। उस समय जनता के कोप से बचाने के लिए जिलाधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक और सेना के कर्नल ने उनसे गुहार लगाई थी। उस समय मैं चाहता तो बहुत कुछ कर सकता था, लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। सुभाष घीसिंग को मैंने समतल तक सुरक्षित पहुंचने में मदद की। गोजमुमो हिंसा में यकीन नहीं करता है।
उन्होंने मदन तमांग की लाश पर ओछी राजनीति करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। मदन तमांग की शवयात्रा के दौरान दार्जिलिंग में गोजमुमो के झंडे व बैनर फाड़ने-जलाने के बारे में उन्होंने कहा कि वह ऐसा करने वालों को माफ करते हैं। इसकी प्रतिक्रिया में हम कुछ नहीं करेंगे, लेकिन लोगों को भी सोचना चाहिए कि ऐसी हरकत से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
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