अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे आदिवासी
बिन्नागुड़ी। आदिवासी अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे। हमें पद नहीं, तराई-डुवार्स में छठी अनुसूची चाहिए। इसकी आवाज दिल्ली तक गूंज चुकी है। ये बातें कहीं अखिल आदिवासी विकास परिषद की तराई-डुवार्स रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जान बारला ने। वह रविवार को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। शनिवार को सुकना में एक जनसभा में विमल गुरुंग ने एलान किया था कि गोरखालैंड राज्य बनने पर उसका मुख्यमंत्री गोरखा तथा गृह, वित्त व शिक्षा मंत्री आदिवासी होगा। बारला ने स्पष्ट किया कि आदिवासी विकास परिषद छठी अनुसूची की मांग से रत्ती भर पीछे नहीं हटेगी और न ही किसी पद के लालच में आएगी। तराई-डुवार्स में रहने वाले आदिवासी भाइयों के विकास के लिए हम अपने बूते पर आंदोलन करेंगे। परिषद अपनी की मांग पर अटल है और इसी के तहत राज्य कमेटी और डुवार्स-तराई रीजनल कमेटी ओर से छठी अनुसूची की मांग को दिल्ली तक पहुंचा दी गई है। हाल ही में इस मांग को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और जनजातीय मंत्री कांतिलाल बूड़िया को परिषद की ओर से ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास परिषद डुवार्स को किसी भी हालत में गोरखालैंड राज्य शामिल नहीं होने देगी। बता दें कि विमल गुरुंग ने कल ही एलान किया था कि यदि बंगाल सरकार सिलीगुड़ी-डुवार्स नहीं देती है तो वह गोजमुमो उसे छीन लेगा। गुरुंग की घोषणा के बाद परिषद की बैठक बानरहाट प्रखंड इकाई कार्यालय में हुई। बैठक के बाद तराई-डुवार्स के आविप प्रवक्ता पारसनाथ बराइक ने कहा कि हम कोई भी आंदोलन खुद के बल पर करेंगे। हमें गोर्खालैंड से ही नफरत है, तो फिर हमें उनके साथ मिलकर वित्त मंत्रालय व स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने का सवाल नहीं उठता है। हमें डुवार्स व तराई के विकास के लिए छठी अनुसूची चाहिए, जो हम अपनी ताकत पर ही ले लेंगे। उन्होंने कहा कि आविप 12 मई को प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेगी।
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