गोरामुमो ने ली गोर्खालैंड की शपथ
सिलीगुड़ी : 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में..' के गीत के साथ गोर्खा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के सदस्यों ने पार्टी की 30वें स्थापना दिवस पर अलग राज्य गोर्खालैंड के लिए जीने-मरने की शपथ ली। शहर से 50 किलोमीटर दूर पानीघाटा गोलाई में जनसभा को संबोधित करते हुए समतल के गोरामुमो नेता राजेन मुखिया ने कहा कि दार्जिलिंग के गब्बर से अब डरने की जरूरत नहीं है। समय आ गया है डराने का। गब्बर बन लोगों को डराने-धमकाने वाला विमल खुद इतने डरे हुए हैं कि इन दिनों जीएलपी के घेरे से बाहर नहीं निकलते। चुनौती दी गई थी कि स्थापना दिवस नहीं मनाने दिया जाएगा।ऐसा होगा तो जीएलपी लाठी लेकर प्रहार करेगा। उस चुनौती को मैंने स्वीकार किया और पानीघाटा में इसे पूरा कर दिखा रहा हूं। मैं इस मंच से जीएलपी के गोर्खा युवाओं को समझाना चाहता हूं कि वे विमल के बहकावे में ना आएं। पड़ोसी देश नेपाल में माओवादी आन्दोलन से जुड़े युवा आज भी सेना में भर्ती के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनके साथ भी ऐसा कुछ नहीं हो। जनता अब जीएलपी का मुकाबला करने को भी तैयार हो गई है। वर्ष 2005 में गोरामुमो सुप्रीमो ने छठी अनुसूची की मांग की थी तो उसका विरोध किया गया। गोजमुमो के नाम पर पार्टी तैयार कर गोर्खालैंड लाकर देने की बात की गई। फिर तीन वर्षो बाद गोर्खालैंड के बदले सेटअप की मांग क्यों? गोरामुमो के झंडे तले हमारे समर्थकों ने शपथ ली है कि गोजमुमो गोर्खाओं के साथ विश्ववासघात कर अंतरिम सेटअप लाता है तो उसे बागडोगरा से पहाड़ पर नहीं चढ़ने दिया जाएगा। राजेन ने कहा कि जन्म लिया है तो मौत तय है, फिर इससे क्या डरना। अस्तित्व की लड़ाई में प्राण जाएगा तो शहीद बनकर याद किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थापना दिवस में आने वाले सैकड़ों समर्थकों को पहाड़ पर रोका गया, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
गोरामुमो के पूर्व पार्षद व नेता दावा पाखरीन ने कहा कि दस मार्च 2010 को विमल गुरुंग शरीर से नहीं, पर वचन से मर चुके हैं। अब उनके सम्बन्ध में कुछ भी कहना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि पांच अप्रैल 1980 को गोरामुमो की स्थापना ही गोर्खालैंड के लिए हुई थी। हमारे नेता सुभाष घीसिंग ने गोर्खाओं को भारतीय होने का सम्मान दिया। गोर्खाओं के लिए दागोपाप का निर्माण किया। वे मिजोरम और नगालैंड की तर्ज पर छठी अनुसूची लाकर फिर इसे अलग राज्य लेना चाहते थे, जिसका विरोध किया गया। विश्वासघाती बन उनके चेले ने ही उनकी पीठ में चाकू मार दिया। उन्होंने खुले मंच से घोषणा की कि तीन वर्षों के अंदर गोजमुमो के अत्याचार में तबाह 200 परिवारों को राज्य सरकार ने नहीं बसाया तो इसे लेकर विधानसभा के सामने आमरण अनशन प्रारम्भ किया जाएगा। पानीघाटा के कंचन क्षेत्री ने जनसभा में खुलासा किया कि गोजमुमो के हिंसक आन्दोलन के कारण ही उन्होंने पार्टी छोड़ गोरामुमो का झंडा उठाया है। स्थापना दिवस के मौके पर राज थापा, जिग्नो शेर्पा, कर्ण प्रधान, जीवन प्रधान, पद्मा प्रधान, सुरेन राई, राजू गुरुंग, किशोर वातर, प्रदीप क्षेत्री, मेरी मिंज तथा नवराज क्षेत्री ने भी जनसभा को सम्बोधित किया। सभा के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसके लिए रैफ, कमांडो और अर्द्धसैनिक बलों के साथ कर्सियांग के एसडीपीओ वहां लगातार कैम्प कर रहे थे। स्थापना दिवस पर एक रैली निकाली गई। इसके बाद झंडोत्तोलन और केक काटा गया।
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