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गोर्खालैंड से ही पहचान : खड़का

VEER GORKHA NEWS NETWORK | 11:45 PM | 0 comments

दार्जिलिंग: गोर्खालैंड राज्य का गठन होने से ही गोर्खाओं को विदेशी के आरोप से मुक्ति मिलेगी। यह बातें मिरिक कालेज के प्राचार्य डा.आनन्द खड़का ने बुधवार को कही। उन्होंने कहा कि गोर्खाओं को विकास से अधिक राष्ट्रीय पहचान की समस्या है। सच्चा भारतीय होने पर भी राष्ट्रीय पहचान के लिए आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि पृथक गोर्खालैंड राज्य बनने के बाद ही विदेशी के लांछन जैसे अपमान से सदा के लिए छुटकारा मिल सकता है। गोर्खालैंड के आगे विकास की बात करना सेकेंडरी बात तो है ही, दूसरी ओर विकास की बात से गोर्खाओं की समस्या का ठोस समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि गोर्खाओं के लिए विकास की नहीं नेशनल आइडेंटीटी की समस्या है। उन्होंने कहा कि केंद्र राज्य सरकार की ओर से बनाए गए सेटअप के मसौदे के तहत उल्लेखित गोर्खालैंड आटोनोमस अथारिटी से मानसिक, आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक विकास होगा लेकिन जीएस से जाति की राष्ट्रीय पहचान को अंजाम नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने
कहा कि गोर्खा जाति सच्चे देशवासी हैं, देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के साथ ही देश को महान समृद्ध बनाने के लिए अन्य सामाजिक कार्य कर रहे हैं। उसी तरह गोर्खाओं ने भी परिश्रम किया है। जिसका उचित मूल्यांकन सरकार द्वारा नहीं किए जाने से गोर्खाओं ने पृथक गोर्खालैंड की मांग की है। डा. खड़का का कहना है कि पृथक राज्य बनने से वहां का विकास किस तरह होगा इसे स्थानीय लोग जानते हैं। विशाल भारत देश में यदि राज्यों का विभाजन नहीं हुआ होता तो 28 राज्यों का निर्माण कैसे होता। गोर्खालैंड बनने पर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदाओं से ही राज्य अपने पैर पर खड़ा हो सकता है। उन्होंने उत्तरांचल (उत्तराखंड) , छत्तीसगढ़, झारखंड की तरफ संकेत करते हुए कहा कि छोटे राज्य के निर्माण के बाद वहां अशांति स्वाभाविक है लेकिन अपने राज्यों को किस तरह उन्नत समृद्ध बनाए इसके लिए दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा होता है। उनहोंने पृथक राज्य बनने से किसी समस्या का समाधान होने को अपवाद मानते हुए कहा कि जाति के सभी तरह के सर्वागीण विकास के लिए पृथक राज्य का निर्माण नितांत रुप में होना अनिवार्य है। उन्होंने गोर्खालैंड की मांग असंवैधानिक बताने वाले और देश के हितैषी गोर्खाओं को विदेशी का आरोप लगाने वालों को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बुद्धिजीवियों को सुझाव दिया कि वह पहले संविधान का अध्ययन करें कि गोर्खाओं ने देश के लिए क्या किया है और क्या देते रहे हैं। उन्होंने गोर्खालैंड राज्य के निर्माण के लिए गांधीवादी आंदोलन को अब तक मिली सफलता के आगे विकास की बातें सदा के लिए रोड़ा बने रहने का विचार व्यक्त किया।

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