प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन को मिली मान्यता
दार्जिलिंग: अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की डुवार्स-तराई रीजनल कमेटी की प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन को गुरुवार को मान्यता मिल गई। उत्तर बंगाल के संयुक्त श्रमायुक्त पशुपति घोष ने गुरुवार की शाम यूनियन को प्रमाण पत्र (मान्यता संख्या - 21526) सौंपा। मान्यता मिलने की खबर मिलते ही श्रमायुक्त कार्यालय के बाहर खड़े श्रमिकों ने गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाई दी। वे काफी देर तक वहां खुशी में झूमते-नाचते रहे। आविप की डुवार्स-तराई रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जान बारला ने कहा कि चाय श्रमिकों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। चाय श्रमिकों को अब अपनी मांगे सरकार और मालिको के सामने रखने का अधिकार मिला है।यूनियन के बैनर तले तराई-डुवार्स के प्रत्येक चाय बागान क्षेत्र में इसका जश्न मनाया जाएगा। आविप के नेता राजेश लकड़ा ने कहा कि शोषण की भट्ठी से मुक्त होने का सही समय आ गया है। आज तक चाय श्रमिकों की समस्याओं को यूनियन नेता सह तरीके से नहीं उठाते थे। श्रमिको को जब अपनी बातें रखने का मौका मिलेगा तो उसका समाधान होना तय है। आविप नेता कृष्णा बड़ाईक, निकोदिन मिंज, राजेश टोप्पो आदि ने कहा कि आविप प्रोग्रेसिव चाय श्रमिक यूनियन श्रमिकों की मजदूरी 250 रुपये प्रतिदिन करने, श्रमिकों को जमीन का संवैधानिक अधिकार देने, यूनियन के नाम पर जबरन चंदा वसूली बंद करने, आदिवासियों को वोट के लिए इस्तेमाल न करने, बागान परिषद में अवैध शराब दुकान व सूदखोरी बंद कराने, मजदूरों के प्रतिनिधि के रूप में बोनस या वेतन मामले में गुप्त बैठक बंद करने, डुवार्स-तराई में हिन्दी स्कूल-कालेज व इंजीनियरिंग कालेज की स्थापना, तिस्ता नदी पर नए पुल का निर्माण, एनएच-31सी को फोर लेन बनाने, 500 बिस्तरयुक्त राष्ट्रस्तरीय अस्पताल बनाने तथा डुवार्स-तराई के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग के समर्थन में आंदोलन जारी रखेगा।
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