विमल ने बेच दिया गोर्खालैंड : मदन
सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग): गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग ने 1200 करोड़ में गोर्खालैंड आंदोलन को बेच दिया है। गुप्त रिपोर्ट की प्रति यह साबित करती है कि गोरामुमो सुभाष घीसिंग के छठी अनुसूची और विमल के अंतरिम सेटअप में कोई अंतर नहीं है। अगर इस सेटअप पर गोजमुमो हस्ताक्षर करता है तो जनता उसे माफ नहीं करेगी। दार्जिलिंग हिल्स में हिंसा का दौर प्रारंभ होगा, जो थमने का नाम नहीं लेगा। जनता गोर्खालैंड आंदोलन के साथ है। वह न तो विमल गुरुंग के साथ है और न ही सुभाष घीसिंग के साथ। मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए अखिल भारतीय गोर्खालीग सुप्रीमो मदन तमांग ने ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जानती है कि तेलंगाना को राज्य बनाने से वह रोक नहीं सकती। इसलिए उसने गोर्खालैंड आंदोलन को समाप्त करने के लिए अंतरिम सेटअप का अस्त्र चलाया है। तमांग ने कहा कि 7 अक्टूबर 2007 को गोजमुमो संगठन बना। फरवरी 2008 में मुख्यमंत्री से मिलकर विमल गुरुंग और उनकी पार्टी ने गोर्खालैंड आंदोलन को गिरवी रख दिया। शर्त थी विमल को दागोपाप का अघोषित चेयरमैन बनाना। उसी के अनुसार अबतक 1200 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया।तमांग ने कहा कि अंतरिम सेटअप के नाम पर राज्य व केंद्र सरकार गोर्खाओं को बांटने की फिराक में है। जनवरी 2005 में जिस छठी अनुसूची की मांग गोरामुमो सुप्रीमो सुभाष घीसिंग ने की थी, विमल का अंतरिम सेटअप उसी का बदला स्वरूप है। तमांग ने कहा कि विमल की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि अंतरिम सेटअप में बोर्ड बनेगा, जिसमें नामित सदस्यों को उसका उत्तराधिकारी बनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो उसके समयाधिकार को बढ़ाया जा सकता है। चुनाव नहीं कराकर पहाड़ के लोगों का शोषण होता रहेगा। ट्राइबल के नाम पर गोर्खाओं में आपसी द्वंद्व हो जाएगा। अगर यह सेटअप मात्र 2011 तक होगा तो फिर इसमें पांच वर्षो के लिए 2000 करोड़ रुपये की मांग क्यों की गई है? पैसा देने में भी केंद्र ने विमल एंड पार्टी को छलने का काम किया है। केंद्र व राज्य सरकार ट्राइबल के नाम पर गोर्खाओं को विभाजित कर हमेशा के लिए गोर्खालैंड आंदोलन समाप्त करना चाहती है। केंद्र सरकार जानती है कि अगर हिल्स में छठी अनुसूची लागू हो गयी तो कभी भी यहां पृथक राज्य आंदोलन नहीं होने वाला। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी राय इसी सेटअप को पांच दशक पूर्व दार्जिलिंग में लागू करना चाहते थे। जनता ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण यह सेटअप लागू न हो सका। बुद्धदेव भट्टाचार्य और प्रणब मुखर्जी की सोची समझी चाल में गोजमुमो के कुछ लोग आ गए और उन्होंने गोर्खाओं की भावनाओं को बेच दिया। टाउन पुलिस और विलेज पुलिस की बात को विस्तार से बताते हुए तमांग ने कहा कि ट्राइबल काउंसिल में यह व्यवस्था है कि उस क्षेत्र में आईपीसी और सीआरपीसी लागू नहीं होगी। वहां मिजोरम की तरह गांवबूढ़ा का फैसला और गांव और शहर की अपनी पुलिस होती है। सेटअप में विभागों की चर्चा करते हुए कहा कि पोर्ट और शिपिंग विभाग में नौकरी देने की बात कही गई है, जबकि पहाड़ में दोनों विभाग का बनना असंभव है।
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