अंतरिम व्यवस्था गोर्खालैंड का विकल्प नहीं
कर्सियांग : अंतरिम व्यवस्था गोर्खालैंड का विकल्प नहीं है। यह बातें गोजमुमो केंद्रीय कमेटी के प्रचार सचिव डा.रोहित शर्मा ने यहां आयोजित जनसभा में कहीं। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग पहाड़ पर राजनीति की खेती करने वाले कई नेता हो गए हैं। उन्होंने गोर्खालीग अध्यक्ष की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उन्हें गोजमुमो के विरुद्ध बोलने के लिए सिलीगुड़ी स्थित उत्तरायण में पेट्रोल पम्प के लिए लाइसेंस मिला है। उन्होंने गोरामुमो सुप्रीमों व गोर्खालीग अध्यक्ष से सतर्क रहने का आह्वान किया। क्यों कि यह लोग जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गोजमुमो के पास दीर्घकालीन योजना है। विमल गुरुंग की गंभीरता पर शंका करना ठीक नहीं है। उन्होंने दावे से कहा कि हमें गोजमुमो अध्यक्ष के नेतृत्व में ही अपनी पहचान प्राप्त होगी। इसलिए हमें किसी भी तरह की भ्रांति नहीं पालनी चाहिए। सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कमेटी सांगठनिक सचिव रतन थापा ने कहा कि गोजमुमो के निर्णायक मोड़ पर पहुंचे आंदोलन को धूमिल करने की साजिश हो रही है। कुछ लोग गोजमुमो में रहकर गोरामुमो की तरफदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गोजमुमो के वेष में बंगाल के एजेंट बनकर आंदोलन को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। विमल गुरूंग की ईमानदारी के कारण गोर्खालैंड आंदोलन निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने कहा कि ऐसे मौके पर हमें ईमानदारी से धैर्य धारण करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गोरामुमो सुप्रीमो की भांति गोजमुमो सुप्रीमो ने मुद्दे की बिक्री नहीं की है। अंतरिम व्यवस्था की तुलना छठी अनुसूची से नहीं होगी। अंतरिम व्यवस्था गोजमुमो की मांग नहीं, बल्कि सरकार के अनुरोध पर यह व्यवस्था वर्ष 2011 तक के लिए है। इसी तरह प्रवीण रहपाल ने कहा कि जब तक पहाड़ पर गोजमुमो है हम सुरक्षित हैं। अंतरिम व्यवस्था के बाद भी गोर्खालैंड का आंदोलन जारी रहेगा। अंतिम आंदोलन में विरोध करना ठीक नहीं है। सांगठनिक सचिव विजय सुंदास ने कहा कि गोर्खालैंड का आंदोलन सड़क से संसद तक पहुंचा है। विमल गुरुंग राजनीतिक नेता नहीं है वह क्रांतिकारी हैं। गोर्खालैंड प्राप्त करने के लिए हमने सही नेता पाया है। गोजमुमो कर्सियांग महकमा कमेटी के सचिव प्रणय थापा ने कहा कि दागोपाप में 28 पार्षदों ने गोर्खालैंड की आवाज को दबाकर रखा था, वर्ष 86 के आंदोलन में गोर्खालैंड की नाव पार नहीं हो पाई तथा 1200 लोग शहीद हुए। उन्होंने कहा कि गोजमुमो सुप्रीमो के नेतृत्व में 30 माह में गोर्खालैंड की आवाज संसद तक पहुंच गई। विमल गुरुंग जैसे साहसी व्यक्ति ही गोर्खालैंड की नौका को पार लगाएंगे।
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