ब्रिटिश सरकार ने 1817 में ही गोर्खा साम्राज्य घोषित किया था
कर्सियांग (दार्जिलिंग): ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1817 में ही गोर्खा साम्राज्य घोषित कर दिया था। गोर्खाओं का क्षेत्र 1700वर्ग किलोमीटर है। इसलिए हम भारत में ही रहकर गोर्खालैंड की मांग कर रहे हैं क्यों कि यह हमारा क्षेत्र है। यह बातें गोजमुमो कर्सियांग महकमा कमेटी उपाध्यक्ष कमल थापा ने शनिवार को स्थानीय मोटर स्टैंड पर आयोजित पथसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि गोर्खालैंड गठन करने के लिए बंगाल सरकार का एनओसी नहीं चाहिए क्यों कि केंद्र द्वारा वर्ष 1988 में जारी अधिसूचना के अनुसार यह भूभाग बंगाल का नहीं है। उन्होंने गोर्खालैंड प्राप्त करने के लिए सभी से एकजुट होने का आह्वान करते हुए 29वें राज्य के रुप में गोर्खालैंड गठन करने की मांग की। विपक्षी पार्टी को चेतावनी देते हुए श्री थापा ने कहा कि विपक्षी मकड़े की जाल बुनने की साजिश कर रहे हैं। इससे जनता को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अंवसर पर स्थानीय पार्टी कार्यालय में बलिदान दिवस सहित विभिन्न कार्यक्रम किए गए। क्यों कि गोजमुमो गांधीवादी नीति पर विश्वास रखती है। इसलिए गोर्खालैंड आंदोलन भी गांधीजी के दिखाए मार्ग के अनुरुप चल रहा है। उन्होंने कहा कि घर में बैठने से गोर्खालैंड का गठन नहीं होगा।उन्होंने आंदोलन में सभी से एकजुट होने का आह्वान किया।नारी मोर्चा कर्सियांग महकमा कमेटी अध्यक्ष सावित्री देवी द्वारा संचालित पथसभा को संबोधित करते हुए युवा मोर्चा कर्सियांग महकमा कमेटी सचिव समीरदीप ब्लोन ने कहा कि हिमाली क्षेत्र में रहने वाले लोगों के प्रति माकपा सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया। इसलिए यहां के लोग प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़े हैं। उन्होंने कहा कि गोजमुमो के गणतांत्रिक व गांधीवादी गोर्खालैंड आंदोलन दबाने व बाधित करने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमें कमजोर न समझे। हमारे पास राज्य चलाने की क्षमता है।हम आसानी से राज्य चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि गोर्खालैंड प्राप्त करने के लिए हमें आंतरिक हृदय से सहयोग नहीं बल्कि सड़क पर उतरकर आंदोलन में शामिल होना जरूरी है। पथसभा से पूर्व शनिवार को भी कर्सियांग टूरिस्ट लाज से रैली निकाली गयी। रैली मोटर स्टैंड पहुंचकर पथसभा में तब्दील हो गई। रैली में शामिल लोग गोर्खालैंड चाहिए, विमल गुरुंग जिंदाबाद, हमें न्याय चाहिए, बंगाल में हम नहीं रहेंगे जैसे नारे लगा रहे थे।
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