नगर विकास मंत्री ने किया आविप और गोजमुमो पर वार
सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग) : नगर विकास मंत्री अशोक नारायण भंट्टाचार्य ने सोमवार को जहां अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद व गोरखा जनमुक्ति मोर्चा पर वार किया। उन्होंने कहा कि आविप आदिवासियों की हितैषी नहीं है। उसके कुछ नेता बिक गए हैं। जबकि विमल गुरुंग के समतल को अंधेरे में डुबाने के बयान पर कहा वह पागलपन कर रहे हैं। प्रशासन को पहाड़ पर सख्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा आंदोलन, दबाव और गन के बल पर दार्जिलिंग की समस्या का समाधान चाहता है, वह संभव नहीं है। पहाड़ पर करोड़ों रुपये का बिजली बिल बकाया है। उसे जनता ने नहीं चुकाया तो वह उसके लिए गले का फांस बन जाएगा।
जहां तक बिजली काटने या न काटने की बात है, यह काम राज्य विद्युत परिषद का है। इसमें मुझे कुछ नहीं कहना। गोजमुमो ने आविप के साथ हाथ मिलाया है। इससे तो आदिवासियों के लिए सबसे खराब समय आ गया है। आविप के कुछ नेता बिक गए हैं। आविप आदिवासियों की हितैषी नहीं, सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभर रहा है। सामूहिक रूप से जब चाय बागानों के श्रमिकों का आंदोलन प्रारंभ हुआ तो उसने विरोध किया। बागान मालिकों ने स्पष्ट कहा था कि वे श्रमिक संगठन में दरार डालने में सफल रहे थे। इसे तराई व डुवार्स के आदिवासियों को समझना चाहिए। पत्रकारों से सोमवार को बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ के हालात लगातार सुधर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन को और सख्त होने की जरूरत है। प्रशासन पहले से ज्यादा प्रभावी दिख रहा है, लेकिन उसे जनता में और विश्वास पैदा करना होगा। त्रिपक्षीय वार्ता या पहाड़ के समाधान के लिए सबसे पहले गोजमुमो को सभी प्रकार के आंदोलनों को बंद करने की घोषणा करनी होगी, और त्रिपक्षीय वार्ता में सभी पार्टियों की सहमति लेनी होगी। गुरुंग की अनाप-शनाप बयानबाजी पहाड़ पर उनके जनाधार खो देने का उदाहरण है। अब पहाड़ पर गोजमुमो की आवाज जनता की आवाज नहीं बनने वाली। जनता में बदलाव का ही नतीजा है कि माकपा तीन वर्षो बाद पिछले दिनों जोनल कमेटी की बैठक करने में सफल रही। गोरामुमो नेता दावा पाखरिन पहाड़ पर चले गए। कई और नेताओं ने पहाड़ पर जाने के लिए जिलाधिकारी और मुझसे मुलाकात की है। उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।
पहाड़ के लोग अब कानून व्यवस्था की बात करने लगे हैं। वे वहां के लोग जंगलराज से मुक्ति चाहते हैं। यह सरकार और प्रशासन के लिए शुभ संकेत है। बदले हालात को देखते हुए ही सरकार ने पहाड़ पर अस्थायी कर्मचारियों के स्थायीकरण, बेरोजगार युवकों को रोजगार की व्यवस्था, पेयजल, शिक्षा और दागोपाप के कार्य को गुणवत्तापूर्वक कराने के लिए कदम उठाया है। बदलते हालात में जल्द ही पहाड़ पर त्रिस्तरीय चुनाव कराकर वहां के लोगों को सारी सुविधाएं मुहैया कराने का काम किया जाएगा। एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि 'नो वर्क-नो पे' पर सरकार अभी फैसला नहीं लेगी। ऐसी जानकारी है कि सरकारी कार्यालयों में नहीं आने वाले कर्मचारियों का समर्थन गोजमुमो के साथ नहीं है, लेकिन वे कार्यालय आने में स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों व जनता से अपील की है कि वे एक बार हिम्मत कर सड़क पर उतर जाएं, ताकि उनके मन से डर खत्म हो जाए। गणतांत्रिक मोर्चा की जनसभा की चर्चा करते हुए भंट्टाचार्य ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है। आज की जनसभा में माकपा की ओर से सांसद सूरज पाठक भाग लेने जाने वाले थे, पर उन्हें अचानक दिल्ली जाना पड़ा। गणतांत्रिक मोर्चा भी अलग राज्य गोरखालैंड की मांग कर रहा है, ऐसे में उसे समर्थन कैसे कर रहे हैं, इस सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि गणतांत्रिक मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि वह पहाड़ पर शांति और कानून व्यवस्था को मजबूत करने का पक्षधर है।
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